क्या होता है रिक्टर पैमाना? कैसा होता है भूकंप की तीव्रता का असर? जानिए।

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आज भूकंप से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। जब कभी भी हमें भूकंप की खबर मिलती है हम उससे होने वाले नुकसान का अनुमान लगाने लगते है। भूकंप की तीव्रता से भूकंप के असर का अनुमान लगाया जा सकता है पर क्या आप जानते है? भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है। भूकंप की तरंगों की तीव्रता मापने के लिए उपयोग किया जाने वाला यंत्र होता है रिक्टर स्केल। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल भी कहा जाता है। इससे 1 से 10 स्केल तक  ही मापा  गया है क्योंकि स्केल 10 से बड़ा भूकंप आजतक दर्ज नहीं किया गया है।

अभीतक का सबसे बड़ा भूकंप साल 1960 में चिली में आया था जिसमे 1400 लोगों ने अपनी जान गवाई थी और करीब 20 लाख लोग बेघर हुए थे।

आईये जानते है कौन से स्केल का क्या मतलब होता है।

2.0 से कम की तीव्रता के भूकंप को सूक्ष्म यानी माइक्रो भूकंप कहते है ये प्रायः महसूस नहीं होते है। इनके एक दिन में 8000 बार होने की संभावना होती है।

2.0 से 2.9 की तीव्रता के भूकंप प्रायः महसूस नहीं होते है लेकिन दर्ज किए जाते है। इनके एक दिन में 1000 बार होने की संभावना होती है।

3.0 से 3.9 की तीव्रता के भूकंप को माइनर भूकंप कहते है ये महसूस होते है लेकिन इनसे कोई क्षति नही होती। इनके एक दिन में 100 बार होने की संभावना होती है।

4.0 से 4.9 की तीव्रता के भूकम्पों को हल्के भूकम्प कहा जाता है। इसमें घरेलू वस्तुओं में कंपन जैसा महसूस होता है। इनके एक वर्ष में 6000 बार होने की संभावना होती है।

5.0 से 5.9 की तीव्रता के भूकम्पों को माध्यम भूकम्प कहा जाता है। इसमें कच्ची इमारतों में क्षति संभव है। इनके एक वर्ष में 800 बार होने की संभावना होती है।

6.0 से 6.9 की तीव्रता के भूकम्पों को शक्तिशाली भूकम्प कहते है। इसमें इमारतों की नींव खिसकने की संभावना होती है। इसका असर 160 किलोमीटर की दूरी तक हो सकता है। इनके एक वर्ष में 120 बार होने की संभावना होती है।

7.0 से 7.9 की तीव्रता के भूकम्पों से बड़ी दुर्घटनाएं संभव ह। इसका असर कई 100 किलोमीटर तक होता है।इनके एक वर्ष में 18 बार होने की संभावना होती है।

8.0 से 8.9 की तीव्रता के भूकंप में विध्वंस निश्चित है और ये कई सौ किलोमीटर तक होता है। इनके एक वर्ष में 1 बार होने की संभावना होती है।

9.0 से 9.9 की तीव्रता के भूकंप बहुत विनाशकारी होते है। इनकी सीमा कई हजार किलोमीटर तक होती है। इनके आने की संभावना 20 वर्ष में एक बार होती है।

10 से अधिक तीव्रता का भूकंप अभी तक दर्ज नहीं हुआ है। इसके असर का अनुमान लगाना बहुत कठिन है।

साभार

शिब्बू

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