कोहिनूर-एक हीरा जिसने कई सल्तनतें तबाह कर दी। कुछ अनसुनी कहानियां।

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रोशनी का पहाड़ जिसने अनेक सल्तनतों को अस्त कर दिया – ये पंक्तियाँ सुनकर आप अवश्य ये सोच रहे होंगे कि इस हीरे में ऐसा क्या था जो सल्तनतें तबाह हो गयी। हम सभी कोहिनूर की बात करते है पर क्या वाकई आप कोहिनूर के बारे ने सब जानते है? चलिए हम आपको आज कोहिनूर के बारें में वो बातें बताएंगे जो शायद ही आपने कहीं और सुनी हो।

इस अनमोल हीरे की खोज 13वीं शताब्दी में आज के तेलंगाना के गुंटुर जिले के गोलकुंडा की खदानों में हुई थी लेकिन इसे किसने सर्वप्रथम देखा ये बात एक राज ही रह गयी। बाबरनामा की मानें तो यह हीरा करीब 1294 ईसवी में ग्वालियर के राजा के पास था।

जब इस हीरे को तराशा गया था तब यह 793 कैरट का था। कई बार कटने के बाद वर्तमान में यह हीरा 105 कैरट का है।

जितना ये हीरा सुंदर था उतना ही श्रापित भी। कहा जाता है कि ये हीरा जिस किसी के पास रहेगा वो दुनिया पे राज करेगा लेकिन दुर्भाग्य भी उसकी किस्मत का एक हिस्सा बन जायेगा। शुरुआत में किसी ने इस बात पर विश्वास नही किया मगर जब हीरा मिलने के बाद काकतीय वंश पर जो ग्रहण लगा तब सभी इस बात को मानने लगे।

ऐसा भी कहा जाता है कि कोहिनूर हीरा किसी पुरुष के पास नही रुकता जिस किसी पुरुष ने इसे अपने पास रखना चाहा उसका सर्वनाश हो गया। तभी इस नायाब हीरे को सिर्फ महिलाओं की शोभा बढ़ाने वाला आभूषण कहा जाने लगा।

16वीं ईसवी में ये हीरा शाहजहां के पास आया जिसे शाहजहां ने अपने सिंहासन पर जड़वा लिया और इसी के साथ फिर शाहजहां उस श्राप के शिकार हुए। मुमताज का जाना, अपने ही पुत्र के हाथों कैदी बनने का कारण भी यही हीरा माना जाता है। इसके बाद फिर शाह वंश हो या दुर्रानी वंश जिसने भी इस हीरे को पाना चाहा उनका विनाश होता चला गया।

करीब 18वीं शताब्दी में ये हीरा राजा रणजीत सिंह के पास आया लेकिन औरों की तरह रणजीत सिंह भी इसे संभाल न सके और यकायक उनकी मृत्यु हो गयी।

इस अनमोल हीरे के श्राप से केवल महिला ही बची हैं। इसलिए इस हीरे को कोई महिला ही धारण कर सकती है। फिलहाल ये हीरा ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के मुकुट की शोभा बढ़ा रहा है।

इस हीरे का जनक होने के नाते भारत आज भी इस हीरे पर अपना अधिकार मानता है और हर भारतवासी को ये उम्मीद है कि ये अनमोल हीरा फिर से भारत की शान बढ़ाएगा।

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